कुए मे एक मेंढक रहता था, उसने सिर्फ यही दुनिया देखी थी । आकाश भी उतना ही देखा था, जितना कुए के अंदर से दिखाई देता है, इसलिए उसकी सोच का दायरा छोटा था तभी अचानक नीचे पानी के रास्ते से वहाँ समुद्र की एक छोटी सी मछली आ पहुंची तो उन दोनों की बातचीत हुई । मछली ने पूछा कि तुम्हे पता है समुद्र कितना बड़ा है ? मेंढक ने एक छलांग लगाई बोला इतना होगा मछली बोली -नही, कि बहुत बड़ा है। मेंढक ने फिर एक किनारे से आधे हिस्से तक छलांग लगाई बोला इतना होगा फिर मछली बोली कि नही । अब की बार मेंढक ने अपना पूरा जोर लगाते हुए एक सिरे से दूसरे सिरे तक छलांग लगाई और बोला कि इससे बड़ा हो ही नही सकता, मछली बोली नही समुद्र इससे बहुत बड़ा है । मेंढक वो विश्वास ही नही हुआ, उसको लगा कि मछली झूठ बोल रही है दोनों ही अपनी अपनी जगह सही थे अंतर था तो उनकी सोच में मछली की सोच अपने माहौल के हिसाब से थी और मेंढक की सोच भी जिस वातावरण...
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